3 दिसंबर 2017 - 16:29
 हश्दुश्शअबी न होती तो पैरिस पर दाइश का झंडा लहरा रहा होता

इराक़ी पार्लियमेंट के सदस्य ने कहा कि मुझे दुख है कि फ्रांस के राष्ट्रपति ने राजनीतिक उसूलों का ध्यान नहीं रखा एवं ऐसा बयान दिया है कि उन्होंने अपने देश के संविधान को भी पैरों तले रौंद दिया है।

अहलेबैत (अ )न्यूज़ एजेंसी अबना : प्राप्त सूत्रों के अनुसार फ्रांस के राष्ट्रपति ईमाएल माक्रून ने हश्दुश्शअबी को समाप्त करने की गुहार की थी, जिस पर इराक़ी पार्लियमेंट के सदस्य हमाम हमूदी ने कहा कि फ्रांस के राष्ट्रपति का यह बयान इराक़ के आंतरिक मामलों में खुला हस्तक्षेप है, जिसको हमारी जनता किसी तरह भी सहन नहीं कर सकती है।
 हमूदी ने आगे कहा कि अच्छा होगा कि फ्रांस हश्दुश्शअबी का सम्मान करे क्योंकि अगर यह संगठन न होता तो आज पेरिस पर दाइश आतंकियो का क़ब्जा हो चुका होता। इराक़ की जनता को विश्व समुदाय विशेषकर फ्रांस से उम्मीद है कि समस्त  विश्व में बहने वाले हमारे जवानों के पवित्र खून की सराहना करें। इराक़ी पार्लियमेंट के सदस्य ने कहा कि मुझे दुख है कि फ्रांस के राष्ट्रपति ने राजनीतिक उसूलों का ध्यान नहीं रखा एवं ऐसा बयान दिया है कि उन्होंने अपने देश के संविधान को भी पैरों तले रौंद दिया है। और मुझे हैरत होती है कि जब फ्रांस के राष्ट्रपति दूसरे देशों के अधिकारियों की आलोचना इस कारण करते हैं कि उनके देश के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप कर रहे हैं जबकि वह स्वयं ही यह काम करते हैं।